“नोटिस के बीच त्रिवेन्द्र का पाण्डेय के घर जाने का ऐलान, गुटबाज़ी खुलकर सामने”

अरविन्द पाण्डेय भाजपा के वही विधायक हैं जिन्हें स्थानीय प्रशासन की ओर से सरकारी भूमि पर अवैध अतिक्रमण के मामले में टाइम बाउण्ड नोटिस जारी हुआ है। नोटिस मिलने से पहले और उसके बाद भी पाण्डेय स्थानीय पुलिस प्रशासन के साथ ही सरकार पर हमलावर रहे हैं। मौजूदा समय में उनका फोकस समूची सरकारी मशीनरी को कथिततौर पर ‘ईमानदारी’ का सर्टिफिकेट बांटने पर है। हालांकि, उनके तंजभरे बयानों को अपनी ही सरकार के साथ सीधे टकराव के रूप में देखा जाता रहा है।
त्रिवेन्द्र सरकार में शिक्षा समेत तमाम महत्वपूर्ण विभागों के कैबिनेट मंत्री रहे अरविन्द पाण्डेय को धामी सरकार के मंत्रिमण्डल में जगह नहीं मिल पाई। मंत्री न बन पाने की कसक लगातार उनके मन में है और तभी से वह अपनी ही पार्टी की सरकार से नाराज रहने लगे। उनकी यह नाखुशी अक्सर उनके बहके-बहके बयानों के जरिए सामने आती रही है। चाहे वह खनन का मुद्दा हो या काशीपुर के किसान सुखवंत सिंह आत्महत्या प्रकरण में सीबीआई जांच की मांग, अपने बेबाक बयानों को लेकर पाण्डेय लगातार चर्चाओं में रहे। बात-बात पर स्थानीय पुलिस प्रशासन से उनका टकराव भी असंतोष जाहिर करता है। यह बात दीगर है कि अरविन्द पाण्डेय भले ही खनन के मसले उठा रहे हों लेकिन पिछले डेढ़ दशक से इस कारोबार में उनकी सीधी दखल रही। दबदबा रहा, बादशाहत रही। उस अवधि में ऐसे भी कई प्रकरण सामने आये जब अवैध खनन में पकड़े गए आरोपी को खुलेआम थाने का ताला झटक कर बाहर निकाला गया। और तो और वर्ष 2019 में अरविन्द पाण्डेय जब कैबिनेट मंत्री थे तो उनके नेतृत्व में खनन कारोबारियों का एक समूह काशीपुर की कुंडैश्वरी पुलिस चौकी पहुंचा जहां खनन कारोबारियों ने चौकी इंचार्ज अर्जुन गिरी गोस्वामी की पिटाई शुरू कर दी, उन्हें बाथरूम में घुसकर जान बचानी पड़ी। फिर उधमसिंनगर के तत्कालीन एसएसपी बरिंदरजीत सिंह के निर्देश पर कैबिनेट मंत्री अरविन्द पाण्डेय समेत 20 नामजद और 125 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। एसएसपी बरिंदरजीत सिंह सख्त अनुशासन और फैसले लेने लगे तो उन्हें पद से हटा दिया गया। अपने तबादले के खिलाफ एसएसपी को हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी। उन्होंने अपनी जान को भी खतरा बताया। बाद में उन्हें फिर से एसएसी ऊधमसिंनगर बनाया गया। अरविन्द पाण्डेय से जुड़े एक अन्य मामले में सुल्तानपुर पट्टी पुलिस चौकी भी फूंक डाली गई थी, मुकदमा दर्ज हुआ, बाद में किस सरकार ने यह मुक़दमा ‘जनहित’ में वापस लिया, यह खोजबीन का विषय है।
मौजूदा समय में, जमीन से जुड़े एक पुराने मामले के मीडिया में उछलने के बाद प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बीते मंगलवार को विधायक पाण्डेय के गूलरभोज स्थित आवास के बाहर नोटिस चस्पा कर दिया। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि 0.158 हेक्टेयर सरकारी भूमि पर हुए अवैध निर्माण को 15 दिनों के भीतर स्वयं हटा लिया जाए अन्यथा ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी। इस नोटिस के बाद पाण्डेय विक्टिम कार्ड खेल रहे हैं और लगातार कह रहे हैं कि वह भ्रष्टाचार और कानून व्यवस्था का मुद्दा उठा रहे हैं इसलिए उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है। हालांकि, नोटिस जारी होने के बाद जमीनों पर कब्जे के एक के बाद एक कुछ और मामले उजागर होने से पाण्डेय की काफी किरकिरी हुई है। पीड़ित उनके खिलाफ धरना प्रदर्शन करने के लिए सामने आने लगे। अरविंद पांडेय के आवास पर चस्पा हुए इस नोटिस को लेकर गहमागहमी चल ही रही थी कि इधर, हरिद्वार के सांसद त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने आज विधायक अरविन्द पाण्डेय के घर पहुंचने को ऐलान कर दिया। सोशल मीडिया पर बाकायदा उनका कार्यक्रम जारी हुआ है। कार्यक्रम के मुताबिक पौड़ी के सांसद अनिल बलूनी और पूर्व कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक भी इस दौरे में त्रिवेन्द्र के साथ आज मौजूद रहेंगे। उनके इस ऐलान को प्रदेश भाजपा के भीतर खुली गुटबाजी के तौर पर देखा जा रहा है। कुछ लोग इसे सत्ता संघर्ष भी मान रहे हैं। हालांकि, त्रिवेद्र और बलूनी का पाण्डेय के घर जाने का असल कारण क्या है, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है। त्रिवेन्द्र सरकार के कालखण्ड की बात करें तो उस वक्त मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत और कैबिनेट मंत्री अरविन्द पाण्डेय के बीच रिश्ते कभी सहज नहीं रहे हैं। खास तौर पर शिक्षा विभाग में तबादलों को लेकर दोनों के बीच विरोधाभाष कई बार सार्वजनिक हुआ था। लेकिन अब नई परिस्थितियों में दोनों एक दूसरे के साथ खड़े होते दिख रहे हैं। सवाल यह है कि क्या त्रिवेन्द्र एक ऐसे विधायक को समर्थन देने पहुंच रहे हैं जिन पर सरकारी जमीन कब्जाने का आरोप है या फिर कुछ और कारण हैं। गदरपुर दौरे में हैविवेट सांसद अनिल बलूनी का त्रिवेन्द्र के साथ होना भी आश्चर्य पैदा करता है। हालांकि हालिया समय में दोनों ही एक दूसरे के बगलगीर हैं। लोकपर्व मनाना हो या फिर कोई ‘रैबार’ देना हो, हर स्थिति में दोनों सहचर की भूमिका में नजर आते हैं।
जारी कार्यक्रम में कहा गया है कि पौड़ी के सांसद अनिल बलूनी और पूर्व कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक भी इस दौरे में त्रिवेन्द्र के साथ मौजूद रहेंगे। जबकि दोनों के सांसद बनने के बाद अब तक त्रिवेन्द्र और बलूनी के जो भी दौरे साथ हुए हैं उनमें बलूनी को ही Dominating स्थिति में देखा गया है। गदरपुर का यह दौरा ठीक उस वक्त हो रहा है जब देश के गृह मंत्री अमित शाह उत्तराखण्ड के दौरे पर हैं। कानाफूसी तो यह भी है कि नेतृत्व परिवर्तन की चाह रखने वाले नेताओं को दिल्ली से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिल पा रहा लिहाजा अब सूबे के भीतर भाजपा परिवार में सियासी गतिविधियां उफान पर हैं। सत्ता संघर्ष की कोशिशों को हवा देने में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही। चौसर सजाई गई है पासे फेंके जा रहे हैं। अनुशासित कहे जाने वाली भाजपा जैसी पार्टी में खुले तौर पर ऐसा होना हैरानी पैदा करता है..
